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Rahul Chouhan
@shivamji78678

एक सज्जन संत के पास पहुंचे व कहने लगे मुझे जीवन मे ये ये मिलगया है परिवार सुखी व संतुष्ट है, व्यापार दान धर्म खूब मनभर के करता हूँ, मुझे कुछ नहीं चाहिए सोचता हूँ अब सब रोक के चुपचाप बैठ जाना चाहता हूँ चैन व सुकून से, संत ने सब कुछ सुना ओर पूछा आपकी उम्र क्या है, अभी कल ही तियालीस पुरे किए है, संत ने कहा, आपके पास स्वास्थ्य समय धन इज्जत सब कुछ है, ये अच्छी बात है,आपने स्वयं को स्थापित किया अपने व परिवार के लिये उसके लिये आपका साधुवाद, परन्तु जो ऊर्जा आपके पास है उसे उपयोग मे नहीं लाओगे तो वह लोहे की तरह जंक लग के सड़ जाएगी उसे आप एक जगह लगाइये, तालाब व नदी मे फर्क ये है कि दोनो जल है पर एक बंधा है दूसरा चलायमान है तालब की सीमा होने से कुछ कम लोग लाभान्वित होते कुछ लोग उसमे अपशिष्ट डाल के दूषित भी कर सकते सड़ाध पैदा होने की सम्भावना बनी ही रहती, तुमभी नदी की तरह अपना विस्तार करलोगे तो तुम्हे भी पूजा जायेगा सारी सृष्टि को अपना मान लो तो, अधिक प्यार व मिलेगा सूकून, जो विरले ही कर पाते है तुममें योग्यता हैं, बस जज्बे को प्रज्जवलित रखो दोनो का मंगल होगा, जरुरत से अधिक कमाना ऊर्जा का उपयोग है व वंचित तक निष्काम भाव से पहुंचना इसी लिये तो मानव तन मिला. Rahul chouhan 9826739586 निष्काम भाव का विस्तार

एक सज्जन संत के पास पहुंचे व कहने लगे मुझे जीवन मे ये ये मिलगया है परिवार सुखी व संतुष्ट है, व्यापार दान धर्म खूब मनभर  के करता हूँ, मुझे कुछ नहीं चाहिए सोचता हूँ अब सब रोक के चुपचाप बैठ जाना चाहता हूँ चैन व सुकून से, संत ने सब कुछ सुना ओर पूछा आपकी उम्र क्या है, अभी कल ही तियालीस पुरे किए है, संत ने कहा, आपके पास स्वास्थ्य समय धन इज्जत सब कुछ है, ये अच्छी बात है,आपने स्वयं को स्थापित किया अपने व परिवार के लिये उसके लिये आपका साधुवाद, परन्तु जो ऊर्जा आपके पास है उसे उपयोग मे नहीं लाओगे तो वह लोहे की तरह जंक लग के सड़ जाएगी उसे आप एक जगह लगाइये, तालाब व नदी मे फर्क ये है कि दोनो जल है पर एक बंधा है दूसरा चलायमान है तालब की सीमा होने से कुछ कम लोग लाभान्वित होते कुछ लोग उसमे अपशिष्ट डाल के दूषित भी कर सकते सड़ाध  पैदा होने की सम्भावना बनी ही रहती, तुमभी नदी की तरह  अपना विस्तार करलोगे तो तुम्हे भी पूजा जायेगा सारी सृष्टि को अपना मान लो तो, अधिक प्यार व मिलेगा सूकून, जो विरले ही कर पाते है तुममें योग्यता हैं, बस जज्बे  को प्रज्जवलित रखो  दोनो का मंगल होगा, जरुरत से अधिक कमाना ऊर्जा का उपयोग है व वंचित तक निष्काम भाव से पहुंचना इसी लिये तो मानव तन मिला.
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